भोपाल। कॉलेजों का एक जुलाई से सत्र प्रारम्भ हुआ है। सरकारी कॉलेजों में 32 फीसदी से अधिक प्राध्यापकों के पद खाली है। कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कार्यालय में पदस्थ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक व सह प्राध्यापकों के अटैचमेंट को समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं।
हालांकि, इस तरह के आदेश कई बार जारी हुए हैं। उच्च शिक्षा विभाग संचालनालय में समय-समय पर अटैच किए गए प्राध्यापक की रवानगी कॉलेजों में कर दी गई है।
इसको लेकर बीते सप्ताह आयुक्त निशांत वरवड़े ने आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से उनके मूल पदस्थापना स्थल पर ज्वाइन करने को कहा था। इसके बाद कई प्राध्यापक कॉलेज में ज्वाइन नहीं कर रहे हैं।
बता दें, कि प्रदेश के 525 कालेजों में प्राध्यापकों के स्वीकृत 11 हजार पदों में से साढ़े तीन हजार पद खाली हैं।
इस आदेश के बाद सतपुड़ा तथा मंत्रालय व विभाग की विभिन्न शाखाओं में में लंबे समय से ओएसडी के तौर पर कार्यरत प्राध्यापक भी हैं। उच्च शिक्षा विभाग में ओएसडी स्तर के स्वीकृत पद पांच हैं, लेकिन करीब 18 प्राध्यापकों को ओएसडी बना रखा है।
पांच ओएसडी को छोड़कर शेष का वेतन भी विभिन्न कॉलेजों से निकल रहा है। वहीं, इनमें कुछ ओएसडी तो ऐसे हैं जिनकी सर्विस का लंबा समय सिर्फ प्रशासकीय कार्य में बीता है। उन्होंने कॉलेजों में पढ़ाने का काम ज्यादा किया ही नहीं। इनके पास कुल 20 साल का पढ़ाने का अनुभव भी नहीं है। कुछ ऐसे ओएसडी हैं जो कुछ समय के लिए कॉलेज जाते हैं और वापस विभाग में प्रशासनिक कार्य में वापस आ जाते हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी धीरेंद्र शुक्ल ने बताया कि विभाग के कार्यालयों में पदस्थ प्राध्यापकों को मूल कार्य में लौटने का आदेश जारी किया गया है। इसमें से कुछ प्राध्यापकों की वापसी हो गई है।


