ग्वालियर। नौकरी के बदले छात्राओं से अस्मत मांगने वाले बीज विकास निगम के प्रक्षेत्र उत्पादन अधिकारी संजीव कुमार तंतुवाय को ग्वालियर पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार किया है। तीन दिन में यह उसकी दूसरी गिरफ्तारी है।
इतने गंभीर मामले में सामान्य छेड़छाड़ की धारा में एफआईआर दर्ज कर अपराधी को नोटिस पर छोड़ने वाली क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को आरोपी का सिटी सेंटर इलाके में सड़क पर जुलूस भी निकाल दिया। इतना ही नहीं उस पर एक और एफआईआर दर्ज की गई है।
जिस दूसरी छात्रा के नाम का उल्लेख पहली एफआईआर में है, उससे खुद क्राइम ब्रांच ने संपर्क किया। फिर छात्रा दूसरी एफआईआर में फरियादी बनी और उस पर एफआईआर दर्ज की गई।
इतनी सक्रियता ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने तब दिखाई, जब खुद मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव इस घटना पर सख्त हुए। उन्होंने खुद अपने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर इस घटना को अंजाम देने वाले अपराधी की सेवाएं समाप्त करने की बात लिखी थी। अगर पहली ही एफआईआर होने के बाद ग्वालियर पुलिस इतनी सख्ती दिखाती तो शायद छात्राओं की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाला आरोपी पहले ही सलाखों के पीछे होता।
क्राइम ब्रांच ने आरोपी को भोपाल से दोबारा गिरफ्तार करने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया। उससे पूछताछ के लिए एक दिन की रिमांड पर भी लिया गया है।
वही, तीसरी छात्रा से भी चर्चा की गई है, अभी इस मामले में एक और एफआईआर हो सकती है।
बता दें कि मूल रूप से रीवा की रहने वाली 26 वर्षीय छात्रा ग्वालियर के सनवैली हाउसिंग सोसायटी में किराए से रहती है। वह यहां कृषि महाविद्यालय से पढ़ाई कर रही है।
मप्र बीज विकास निगम में टेक्निल असिस्टेंट के 10 रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति होनी थी। यह भर्ती ग्वालियर और जबलपुर के लिए थी। 13 अभ्यर्थियों ने इसके लिए आवेदन दिए। 27 दिसंबर को जबलपुर में साक्षात्कार था। 3 जनवरी को ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की प्लेसमेंट सेल में साक्षात्कार था। इसमें छात्रा और उसकी दो अन्य सहपाठी छात्राओं ने साक्षात्कार दिया था।
साक्षात्कार के बाद तीनों ही छात्राओं के पास संजीव कुमार तंतुवाय का काल और वाट्सएप पर मैसेज आए। उसने कहा कि अगर नौकरी चाहिए तो एक रात साथ बितानी होगी। उसने सेक्स फेवर की बात वाइस काल और मैसेज के जरिये की। आरोपी ने खुद को इंटरव्यू पैनल में शामिल होना बताया था। 7 जनवरी को एक छात्रा ने शिकायत की। 13 जनवरी को एफआईआर दर्ज हुई और क्राइम ब्रांच की साइबर विंग ने आरोपी को पकड़ लिया, लेकिन एफआईआर आइपीसी की धारा 354 क के तहत थी। जमानती धारा होने के चलते उसे चंद घंटों में ही मोबाइल जब्त कर नोटिस पर छोड़ दिया।

